बुधवार, 4 जनवरी 2012

makar sankranti

भारत में हर पर्व को बड़ी श्रद्धा आस्था एवं उत्साह के साथ मनाया जाता है | मकर संक्रांति का पर्व सम्पूर्ण भारत में सूर्योपासना के रूप में मनाया जाता है | सूर्य प्रत्यक्ष द्रष्टिगोचर होने वाले एक मात्र देवता है | इसीलिए मकर संक्रांति के दिन सूर्य की पूजा कर उससे ऊर्जा प्राप्त करने का विशेष महत्त्व है | सूर्य जब मकर राशी में प्रवेश करते है तब राशी परिवर्तन का वह दिन ही मकर संक्रांति या उत्तरायण प्रारंभ कहलाता है | उत्तरायण शब्द उत्तर एवं अयन से मिलकर बना है | अयन का अर्थ होता है चलना | अर्थात सूर्य के उत्तर दिशा में चलने को उत्तरायण कहते है | उत्तरायण कल को प्राचीन ऋषि मुनियों ने पराविद्या , जप , तप , सिद्धि प्राप्त करने के लिए उचित समय माना है | चूकी मकर संक्रांति उत्तरायण काल का प्रारंभ माना जाता है इसीलिए इस दिन किया गया दान , पुन्य , फलदायी होता है | 
खगोलीय आधार :- गृह के एक राशी से दूसरी राशी में परिवर्तन को संक्रांति कहते है | सूर्य के धनु राशी से मकर राशी में प्रवेश के कारन इसे मकर संक्रांति कहते है तथा इसे अयन संक्रांति होने के कारण महत्वपूर्ण माना जाता है | रविवार को आने वाली संक्रांति धोरा संक्रांति , सोम को स्वक्षी , मंगल को महोदरी , बुध को मन्दाकिनी , गुरु को मंदा , शुक्र को मिश्रिता , शनि को राक्षसी संक्रांति कहलाती है | 

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